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“अपनी सर्वोच्च समृद्धि को जानो” यह किताब दनि ु या भर के सच्चे साधकों को उस परम सत्य को जानने में मदद करने के लिए लिखी गयी है, जो आत्मज्ञान की कमी के कारण अज्ञात और अनदेखा रह जाता है। यहाँ, आत्मज्ञान को अधिक विस्तार से समझाया गया है ताकि हर सच्चे साधक को जन्म और मृत्यु से परे शाश्वत सत्य को जानने में सहायता मिल सके । जीएम कहती हैं हम न तो स्वयं के प्रति सचेत हैं और न ही यह जानते हैं कि ‘चेतना’ क्या है। जीएम इस पर जोर देती हैं कि निरंतर शांति में स्थित रहकर हम द्वैत को पार कर सकते हैं और अपनी अद्वैत सर्वोच्च वास्तविकता को जान सकते हैं। जीएम की शिक्षाएँ सीधे स्रोत से आती हैं, और उनका हर उत्तर स्रोत से ऐसे निकलता है जैसे धनुष से निकला तीर। जीएम का हर उत्तर उन साधकों के लिए एक दवा है, जो व्यक्तित्व के कारण पीड़ित हैं। जीएम चेतना और उसकी प्रकृति के बारे में बात करती हैं। जीएम कहती हैं, “कोई भी कभी जन्म नहीं लेता; जो जन्म लेता है, वह केवल एक स्वप्न है, जिसमें अंतरिक्ष में जन्म और मृत्यु भी शामिल हैं।” जीएम के उत्तर प्रभावशाली हैं और पाठकों को सहजता से शांति में स्थित होने के लिए प्रेरित करते हैं। यह पुस्तक उन साधकों को प्रोत्साहित करती है जो दशकों से ध्यान कर रहे हैं और फिर भी अपनी सर्वोच्च समृद्धि से अनभिज्ञ हैं, ताकि वे अपने भीतर विद्यमान शाश्वत सत्य का अन्वेषण कर सकें ।

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